Monday, December 29, 2014

हर चिज व काम करने का या जताने का एक सही समय होता है !


Don't try to show non-valuable things to your Girl, to your Daughter, to your younger Sister or to your younger sister-in-low  that you are senior than her or you are earning name, fame, money or blah- blah- blah. Because your girls are doing continuously same or can do many things better than you (male) with maintaining peace without your help.

- Because I don't think, a sister need any brother if he don't make her feel that her brother loves or care his sister,
- Because I don't think, a daughter of Father need father's love in present if she didn't get/feel in previous days (Except MOM)

- Because if you look into a girl's past, present & future then she had no need of yours three thing in any time even not your money not your fame & not your name from the very early age of the girl.
                     Then how could you male say or how the girl  believe that in present really you as a brother or as a father or brother-in-low, you care her or you love her, Not possible for her anyhow  to believe at you Never! But yes, for many thing she is :) happy & thankful to you that; - Because of you male, she became brave, she can face challenges easily & happily, because she became social, kind, helpful by understanding people because she cares to others at right time rather than to herself own.

In Conclusion, just try to show your love with cares at right time acc. to time passing & situation without your these non-valuable three things i.e. Name, Fame & Money. So that your girl respect you (male; Brother, Father, Brother in low or other), obey you but not because of you are blood-hood or senior than her or any relatives but because of your good, caring & lovable behavior, she respect you.

- Sanjita Karn

Thursday, December 25, 2014

माँ की पेहचान से ही मेरी पेहचान ! (Part-I)

  माँ कि पेहचान से सुरु होती है मेरी पेहचान, एक लड्की कि पेहचान !
 
आज फिर मेरी आखों से आसुँ रुक्ने का नाम नही ले रही है, रात को २:४६ am हो रही है पर मुझे निन्द नही आ रही क्योंकी जिस पल को मैं  अपने जीवन का सबसे बडा दुखदायी पल और गल्ति समझ्ती हुँ वो पल  नाचाहते हुवे भी फिरसे याद आ रही है | क्योंकी आज फिर से मैने एक लड्की को अपने माँ के पास रोते हुवे देख रही थि, वो लड्की रो तो रही थि पर उसे हि मालुम नही था कि उसकी माँ उसे सुन भी रही थि या नही | फिर भी वो रोए जा रही थि, रोए जा रही थि इसलिए नही कि उसकी माँ उसे नाराज थि, इसलिए नही कि उसकी माँ उसको डाट रही थि, बल्कि इसिलिए कि उस लड्की ने अपनी माँ को खो चुकी, अपनी माँ कि  ममता को हमेशा के लिए खो चुकी, इसलिए वो लड्की अपनी माँ कि अन्तिम सईया  पे रोए जा रही थि रोए जा रही थि | ये देख्के फिर से मुझे मेरी माँ याद आ पडी, जिस् याद से मैं हमेशा भाग्ना चाहती हुँ, पर फिर भी उनकी याद मुझे कहिँ न कहिँ आ हि जाती है और मैं भाग् कर भी भाग् नही पाती | क्योंकी मैं उन यादो को भुला नही पाती जो मैने माँ के साथ गुजारें, जिसमे सिर्फ उनकी त्याग ही त्याग था पर ढेर सारी ममता भढी हुई थी, जिनकी त्याग को मैं या हम भाई बेहेने मे से कोई भी भरपाई नही कर सकतें |
माँ कि जीवन से मैने जाना कि एक माँ सिर्फ अपने बच्चो को ९ महिने अपने कोख मे दर्द झेल्ते हुवे ही नही जन्म देती या नही पाल्ती बल्की वो नाचाहते हुवे भी उनका पुरा जीवन बच्चो के लिए संघर्समय हो जाता है, पर फिर भी वो खुसी खुसी संघर्स करती रह्तीं हैं, इसलिए नही कि उनका जीवन सफल हो जाए बल्की इसलिए कि उनके बच्चों का जीवन सुखमय और सफल हो जाए , और अगर उनकी संघर्स रंग लाती है तो वो माँ दिल खुसी से झुम उठ्तीं हैं, पर अगर उनका संघर्स रंग ना लाए तो उनका त्याग, कुर्बानी, संघर्स मिट्टी मे मिल जाती, तब वो माँ दुखी हो जाती हैं पर फिर भी अपने बच्चों दिलाषा देतीं हैं कि एक दिन ऐसा जरुर आएगा जहाँ सब ठिक हो जाएगा, ऐसा दिलासा देकर ओ तो अपने बच्चों को चुप करा देती हैं |
एसे थीं मेरी माँ जो हमारी खुसी मे झुम उठ्ती थि और हमारे दुखी होने पर उन्कें आसुँ रुके नही रुकते फिर भी ओ अपने बच्चो को दिलासा देती रहती थि पर उनहे खुद को दिलासा देने वाला उन्हे कोई आस पास नही दिखता था, जो दिखता भी था तो इस जालिम और स्वार्थी दुनियामे कोई देने वाला था भी नही, सबको अपनी अपनी पडी रहती थि किसी को सिर्फ पढाई, तो किसिको सिर्फ रुपयें, तो किसिको सिर्फ अपना नाम - सौहरत, | इसिलिए ओ खुद्से कभी हार नही मानी और संघर्स करती रहती इस इन्तजार मे एक दिन तो ऐसा आएगा जहाँ मेरा पति, मेरे बच्चो का पापा मुझसे या मेरे बच्चों से प्यार से बात करेंगे, रुपयें, नाम- सौहरत से ज्यादा हम इन्सानों गुदानेंगे और घर शान्ति बनेगी | पर इसी इन्तजार मे बच्चो से दुर रहके पैसा कमाती और अपने बच्चों के पापा के पास सारी पैसा भेज देती, ओ खुद भी बच्चों के साथ रहना चाहती थि, बच्चें भी माँ के साथ रहना चाहते थे पर इन ये पैसा दिवार बनके खडा था माँ और बच्चो के बीच | माँ ५बच्चें हैं,जिन्मे से ४ बेटियाँ और १ बेटा है, इन्की सारे बच्चें इन्ही कि तरह मासुम हैं और अपने पापा से कुछ भी कहने मे बहुत ही डरते है, पर इसी बच्चें मे से एक लड्की जो ४थीं, बितियाँ  मे छोटी बेटी है, जो थोडी कम डरती थि किसी से भी क्योंकी उस लड्की के आस पास हो रहे हर पल को वो परखने कि कोसिस करति थि और उसका बिरोध भी करना चाहती थि अपने लिए नही पर अपने माँ के लिए क्योंकी उसे मालुम था कि उसकी माँ अच्छा नही हो रहा है, उसकी माँ भी इन्सान है और उसे भी इन्सान कि तरह रखना चाहिए इसलिए वो लड्की कभी कभी अपने पापा से बोल पडती थि, पर उसके बोल्ने से और माहोल गम्भीर और बिगर जाता था और तब और फिर माँ को हि झेलना पड़ता | ये देख्केउन बच्चो मे जो बोल्ने कि थोडी सी हिम्मत थि वो लुप्त होती गई, उन बच्चों का साहस मिट्ता गया | सायद यहि सब वजह रह होगा कि वे बच्चे चाहे पढाई हो या कोई भी अच्छी बात थोडी से बोल्ने मे डरते हैं, बोल नही पाते और बाहर परेसानी भोगत्त रहे हैं | ये देख्के माँ भी बहुत चिन्ता करती रहती थि और इसी चिन्ता कि वजाह से उन्हे कुछ बिमरियो ने जकड लिया जिनमे से एक  मधुमेह और क्यान्सर भी था  | फिर भी माँ पैसो के लिए काम करति रही और बच्चो को अच्छे से पढ़ाने के लिए संघर्स करती रही |

ये सब ओ  छोटी बेटी देख रही थि, उसे अच्छा नही लग रहा था फिर भी उसे साहस नही हो पाता था बोल्ने के लिए कि उसके पापा उसकी माँ के साथ जो कर रहे हैं वो सरासर गलत है | वो लड्की भी अपनी माँ कि तरह चुप रहती और इसी उमिद मे रहती कि जों कि पापा कोई सराब, जांड, सुर्ती नही खाते तो एक न एक दिन उसका  पापा को खुद महसुस होगा ही कि वो माँ के साथ जो हो रहा है और वो जो भी कर रहे हैं ओ सहि नही है, और तब पापा अपने गल्ती को सुधार लेंगे और घरमे शान्ति बनेगी और तब माँ और भाई बेहेने भी खुस रहने लगेंगे | पर उस बेवकुफ लड्की को मालुम नही था कि अभि वो बोल्ने हिम्मत व साहस नही जुटा पाई तो बाद मे इस्का कोई फायदा भी नही, तब तक देर हो जाएगी | और ऐसा हि हुआ उसकी माँ कि निधन हो गई ..................................? रातको अभि ३:४६ हो राहा है, इसलिए अब मुझे जैसे भी सो जाना चाहिए, क्योंकी सुबह ५:१५ मे उठुंगी तभी College समय पे पहुँच पाउंगी | शुभरात्री !!

(क्यों चाहिए आपको भी समय रह्ते ही हिम्म्त्त और साहस इस्का खुलासा आपको अग्ले पोस्ट मे मिलेगा, जिसमे आपको मालुम होगा कि अचानक माँ कि मौत कैसे हुई ?............... )

बाँकी (Part - II ) : अग्ले पोस्ट


संजिता कर्ण